तंत्र-सूत्र—विधि-02 (ओशो)

जब श्‍वास नीचे से ऊपर की और मुड़ती है, और फिर जब श्‍वास ऊपर से नीचे की और मुड़ती है— इन दो मोड़ों के द्वारा उपलब्‍ध हो। थोड़े फर्क के साथ यह वही विधि है; और अब अंतराल पर न होकर मोड़ पर है। बाहर जाने वाली और अंदर जाने वाली श्‍वास एक वर्तुल बनाती … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-02 (ओशो)

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