तंत्र-सूत्र—विधि-04 (ओशो)

या जब श्‍वास पूरी तरह बाहर गई है और स्‍वय: ठहरी है, या पूरी तरह भीतर आई है और ठहरी है— ऐसे जागतिक विराम के क्षण में व्‍यक्‍ति का क्षुद्र अहंकार विसर्जित हो जाता है। केवल अशुद्ध के लिए यह कठिन है। लेकिन तब तो यह विधि सब के लिए कठिन है, क्‍योंकि शिव कहते … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-04 (ओशो)