तंत्र-सूत्र—विधि-41 (ओशो)

ध्‍वनि-संबंधी पाँचवीं विधि: ‘’तार वाले वाद्यों को सुनते हुए उनकी संयुक्‍त केंद्रित ध्‍वनि को सुनो; इस प्रकार सर्वव्‍यापकता को उपलब्‍ध होओ। वही चीज। ‘’तार वाले वाद्यों को सुनते हुए उनकी संयुक्‍त केंद्रीय ध्‍वनि को सुनो; इस प्रकार सर्वव्‍यापकता को उपलब्‍ध होओ।‘’ तुम किसी वाद्य को सुन रहे हो—सितार या किसी अनय वाद्य को। उसमें कई … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-41 (ओशो)

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