तंत्र सूत्र—विधि -57 (ओशो)

साक्षित्व की पहली विधि– ‘’तीव्र कामना की मनोदशा में अनुद्विग्‍न रहो।‘’ जब तुम्‍हें कामना घेरती है, चाहे पकड़ती है, तो तुम उत्‍तेजित हो जाते हो, उद्विग्न हो जाते हो। यह स्‍वाभाविक है। जब चाह पकड़ती है तो मन डोलने लगता है। उसकी सतह पर लहरें उठने लगती है। कामना तुम्‍हें खींचकर कहीं भविष्‍य में ले … Read more तंत्र सूत्र—विधि -57 (ओशो)