तंत्र सूत्र—विधि -60 (ओशो)

साक्षित्व की चौथी विधि– ‘’विषय और वासना जैसे दूसरों में है वैसे ही मुझमें है। इस भांति स्‍वीकार करके उन्‍हें रूपांतरित होने दो।‘’ यह विधि बहुत सहयोगी हो सकती है। जब तुम क्रोधित होते हो तो तुम सदा अपने क्रोध को उचित मानते हो। लेकिन जब कोई दूसरा क्रोधित होता है तो तुम उसकी सदा … Read more तंत्र सूत्र—विधि -60 (ओशो)