तंत्र सूत्र—विधि -64 (ओशो)

‘’छींक के आरंभ में, भय में, खाई-खड्ड के कगार पर, युद्ध से भागने पर, अत्‍यंत कुतूहल में, भूख के आरंभ में और भूख के अंत में, सतत बोध रखो।‘’ यह विधि देखने में बहुत सरल मालूम पड़ती है। छींक के आरंभ में, भय में, चिंता में, भूख के पहले या भूख के अंत में सतत … Read more तंत्र सूत्र—विधि -64 (ओशो)