तंत्र सूत्र—विधि -65 (ओशो)

‘’अन्‍य देशनाओं के लिए जो शुद्धता है वह हमारे लिए अशुद्धता ही है। वस्‍तुत: किसी को भी शुद्ध या अशुद्ध की तरह मत जानों।‘’ यह तंत्र का एक बुनियादी संदेश है। तुम्‍हारे लिए यह बड़ी कठिन धारणा होगी; क्‍योंकि यह बिलकुल ही गैर-नैतिक धारणा है। मैं इसे अनैतिक नहीं कहूंगा। क्‍योंकि तंत्र को नीति-अनीति से … Read more तंत्र सूत्र—विधि -65 (ओशो)