तंत्र सूत्र—विधि -66 (ओशो)

‘मित्र और अजनबी के प्रति, मान और अपमान में, असमता और समभाव रखो।’ ‘असमता के बीच समभाव रखो।’ यह आधार है। तुम्‍हारे भीतर क्‍या घटित हो रहा है। दो चीजें घटित हो रही है। तुम्‍हारे भीतर कोई चीज निरंतर वैसी ही रहती है; वह कभी नहीं बदलती। शायद तुमने इसका निरीक्षण न किया हो। शायद … Read more तंत्र सूत्र—विधि -66 (ओशो)