तंत्र सूत्र—विधि -84 (ओशो)

अनासक्‍ति—संबंधी पहली विधि: ‘शरीर के प्रति आसक्‍ति को दूर हटाओं और यह भाव करो कि मैं सर्वत्र हूं। जो सर्वत्र है वह आनंदित है।’ बहुत सी बातें समझने जैसी है। ‘शरीर के प्रति आसक्‍ति को दूर हटाओं।’ शरीर के प्रति हमारी आसक्‍ति प्रगाढ़ है। वह अनिवार्य है; वह स्‍वाभाविक है। तुम अनेक-अनेक जन्‍मों से शरीर … Read more तंत्र सूत्र—विधि -84 (ओशो)