संभोग से समाधि की ओर—02 (ओशो)

संभोग : परमात्‍मा की सृजन उर्जा—2 लेकिन आदमी ने जो-जो निसर्ग के ऊपर इंजीनियरिंग की है, जो-जो उसने अपने अपनी यांत्रिक धारणाओं को ठोकने की और बिठाने की कोशिश की है, उससे गंगाए रूक गयी है। जगह-जगह अवरूद्ध हो गयी है। और फिर आदमी को दोष दिया जा रहा है। किसी बीज को दोष देने … Read more संभोग से समाधि की ओर—02 (ओशो)