संभोग से समाधि की ओर—04 (ओशो)

संभोग : परमात्‍मा की सृजन-ऊर्जा—4 वह दूसरा सूत्र है मनुष्‍य का यह भाव कि ‘मैं हूं’, ‘’ईगो’’, उसका अहंकार, कि मैं हूं। बुरे लोग तो कहते है कि मैं हूं। अच्‍छे लोग और जोर से कहते है ‘’मैं हूं’’—और मुझे स्‍वर्ग जाना है और मोक्ष जाना है और मुझे यह करना है और मुझे वह … Read more संभोग से समाधि की ओर—04 (ओशो)

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