संभोग से समाधि की ओर—07 (ओशो)

संभोग : अहं-शून्‍यता की झलक—3 क्‍या आपने कभी सोचा है? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते है, जाति भूल सकते है। चेहरा भूल सकते है? अगर मैं आप से मिलूं या मुझे आप मिलें तो मैं सब भूल सकता हूं—कि आपका नाम क्‍या था,आपका चेहरा क्‍या था, आपकी जाति क्‍या थी, उम्र क्‍या थी … Read more संभोग से समाधि की ओर—07 (ओशो)