संभोग से समाधि की ओर—15 (ओशो)

समाधि: अहं-शून्‍यता, समय शून्‍यता का अनुभव—4 लेकिन जो जानते है, वे यह कहेंगे,दो व्‍यक्‍ति अनिवार्यता: दो अलग-अलग व्‍यक्‍ति है। वे जबरदस्‍ती क्षण भी को मिल सकते है। लेकिन सदा के लिए नहीं मिल सकते। यही प्रेमियों की पीड़ा और कष्‍ट है कि निरंतर एक संघर्ष खड़ा हो जाता है। जिसे प्रेम करते है, उसी से … Read more संभोग से समाधि की ओर—15 (ओशो)