संभोग से समाधि की ओर—23 (ओशो)

यौन : जीवन का ऊर्जा-आयाम–6 इस लिए मैं तंत्र के पक्ष में हूं, त्‍याग के पक्ष में नहीं हूं। और मेरा मानना है जब तक धर्म दुनिया से समाप्‍त नहीं होते, तब तक दुनिया सुखी नहीं हो सकती। शांत नहीं हो सकती। सारे रोग की जड़ इनमें छिपी है। तंत्र की दृष्‍टि बिलकुल उल्‍टी है। … Read more संभोग से समाधि की ओर—23 (ओशो)