संभोग से समाधि की ओर—38 (ओशो)

विद्रोह क्‍या है? दूसरा सूत्र है—सहज जीवन—जैसे है। लेकिन सहज होना बहुत कठिन है। सहज होना सच में ही बहुत कठिन बात है। क्‍योंकि हम इतने असहज हो गए है कि हमने इतनी यात्रा कर ली है। अभिनय की कि वहां लौट जाना, जहां हमारी सच्‍चाई प्रकट हो जाये, बहुत मुश्‍किल है। डॉक्‍टर पर्ल्‍स एक … Read more संभोग से समाधि की ओर—38 (ओशो)