संभोग से समाधि की ओर—41 (ओशो)

संभोग से समाधि की ओर–ओशो (प्रवचन तैरहवां) नारी और क्रांति—प्रवचन तैरहवां मेरे प्रिय आत्मन व्यक्तियों में ही, मनुष्य में ही सी और पुरुष नहीं होते हैं—पशुओं में भी पक्षियों में भी। लेकिन एक और भी नयी बात आपसे कहना चाहता हू : देशों में भी सी और पुरुष देश होते हैं। भारत एक सी देश … Read more संभोग से समाधि की ओर—41 (ओशो)

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