संभोग से समाधि की ओर—43 (ओशो)

संभोग से समाधि की ओर–ओशो (प्रन्‍द्रहवां प्रवचन) सिद्धन, शास्त्र और वाद से मुक्ति—पन्‍द्रंहवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्‍मन अभी-अभी सूरज निकला। सूरज के दर्शन कर रहा था। देखा आकाश में दो पक्षी उड़े जा रहे हैं। आकाश में न तो कोई रास्ता है, न कोई सीमा है, न कोई दीवाल है, न उड़नेवाले पक्षियों के कोई … Read more संभोग से समाधि की ओर—43 (ओशो)