तंत्र सूत्र—विधि -62 (ओशो)

‘’जहां कहीं तुम्‍हारा मन भटकता है, भीतर या बाहर, उसी स्‍थान पर, यह।‘’ मन एक द्वार है—यही मन जहां कही भी भटकता है, जो कुछ भी सोचता है। मनन करता है। सपने देखता है। यही मन और यही क्षण द्वार है। यही एक अति क्रांतिकारी विधि है, क्‍योंकि हम कभी नहीं सोचते कि साधारण मन … Read more तंत्र सूत्र—विधि -62 (ओशो)