तंत्र सूत्र—विधि -63 (ओशो)

‘’जब किसी इंद्रिय-विषय के द्वारा स्‍पष्‍ट बोध हो, उसी बोध में स्‍थित होओ।‘’ तुम अपनी आँख के द्वारा देखते हो। ध्‍यान रहे, तुम अपनी आँख के द्वारा देखते हो। आंखे नहीं देख सकती। उनके द्वारा तुम देखते हो। द्रष्‍टा पीछे छिपा है। भीतर छिपा है; आंखें बस द्वार है। झरोखे है। लेकिन हम सदा सोचते … Read more तंत्र सूत्र—विधि -63 (ओशो)