तंत्र-सूत्र—विधि-24 (ओशो)

केंद्रित होने की बारहवीं विधि: ‘’जब किसी व्‍यक्‍ति के पक्ष या विपक्ष में कोई भाव उठे तो उसे उस व्‍यक्‍ति पर मत आरोपित करे।‘’ अगर हमें किसी के विरूद्ध घृणा अनुभव हो या किसी के लिए प्रेम अनुभव हो तो हम क्‍या करते है? हम उस घृणा या प्रेम को उस व्‍यक्‍ति पर आरोपित कर … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-24 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-23 (ओशो)

केंद्रित होने की ग्‍यारहवीं विधि: ‘’अपने सामने किसी विषय को अनुभव करो। इस एक को छोड़कर अन्‍य सभी विषयों की अनुपस्‍थिति को अनुभव करो। फिर विषय-भाव और अनुपस्‍थिति भाव को भी छोड़कर आत्‍मोपलब्‍ध होओ।‘’ ‘’अपने सामने किसी विषय को अनुभव करो।‘’ कोई भी विषय, उदाहरण के लिए एक गुलाब का फूल है—कोई भी चीज चलेगी। … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-23 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-22 (ओशो)

केंद्रित होने की दसवीं विधि: ‘’अपने अवधान को ऐसी जगह रखो, जहां अतीत की किसी घटना को देख रहे हो और अपने शरीर को भी। रूप के वर्तमान लक्षण खो जायेगे, और तुम रूपांतरित हो जाओगे।‘’ तुम अपने अतीत को याद कर रहे हो। चाहे वह कोई भी घटना हो; तुम्‍हारा बचपन, तुम्‍हारा प्रेम, पिता … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-22 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-21( ओशो)

केंद्रित होने की नौवीं विधि: ‘’अपने अमृत भरे शरीर के किसी अंग को सुई से भेदो, और भद्रता के साथ उस भेदन में प्रवेश करो, और आंतरिक शुद्धि को उपलब्‍ध होओ।‘’ यह सूत्र कहता है: ‘’अपने अमृत भरे शरीर के किसी अंग को सुई से भेदों…..।‘’ तुम्‍हारा शरीर मात्र शरीर नहीं है, वह तुमसे भरा … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-21( ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-20 (ओशो)

केंद्रित होने की आठवीं विधि: ‘’किसी चलते वाहन में लयवद्ध झुलने के द्वारा, अनुभव को प्राप्‍त हो। या किसी अचल वाहन में अपने को मंद से मंदतर होते अदृश्‍य वर्तृलों में झुलने देने से भी।‘’ दूसरे ढंग से यह वही है। ‘’किसी चलते वाहन में……….।‘’ तुम रेलगाड़ी या बैलगाड़ी से यात्रा कर रहे हो। जब … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-20 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-19 ( ओशो)

केंद्रित होने की सातवीं विधि: ‘’पाँवों या हाथों को सहारा दिए बिना सिर्फ नितंबों पर बैठो। अचानक केंद्रित हो जाओगे।‘’ चीन में ताओ वादियों ने सदियों से इस विधि को प्रयोग किया है। यह एक अद्भुत विधि है और बहुत सरल भी। इसे प्रयोग करो: ‘’पाँवों या हाथों को सहारा दिए बिना सिर्फ नितंबों पर … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-19 ( ओशो)