संभोग से समाधि की ओर—29 (ओशो)

प्रेम ओर विवाह– मेरी दृष्‍टि में जब तक एक स्‍त्री और पुरूष परिपूर्ण प्रेम के आधार पर मिलते हे, उनका संभोग होता है। उनका मिलन होता है तो उस परिपूर्ण प्रेम के तल पर उनके शरीर ही नहीं मिलते है। उनकी आत्‍मा भी मिलती है। वे एक लयपूर्ण संगीत में डूब जाते है। वे दोनों … Read more संभोग से समाधि की ओर—29 (ओशो)

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