संभोग से समाधि की ओर—44 (ओशो)

संभोग से समाधि की ओर–ओशो (सोलहवां प्रवचन) भीड़ से, समाज से-दूसरों से मुक्ति—सोलहवां प्रवचन मेरे प्रिय आत्मन, मनुष्य का जीवन जैसा हो सकता है, मनुष्य जीवन में जो पा सकता है। मनुष्य जिसे पाने के लिये पैदा होता है-वही उससे छूट जाता है। वह उसे नही मिल पाता है कभी किसी एक मनुष्य के जीवन … Read more संभोग से समाधि की ओर—44 (ओशो)