तंत्र-सूत्र—विधि-05 (ओशो)

भृकुटियों के बीच अवधान को स्‍थिर कर विचार को मन के सामने करो। फिर सहस्‍त्रार तक रूप को श्‍वास-तत्‍व से, प्राण से भरने दो। वहां वह प्रकाश की तरह बरसेगा। यह विधि पाइथागोरस को दी गई थी। पाइथागोरस इसे लेकर यूनान वापस गए। और वह पश्‍चिम के समस्‍त रहस्‍यवाद के आधार बन गए। पश्‍चिम में … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-05 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-04 (ओशो)

या जब श्‍वास पूरी तरह बाहर गई है और स्‍वय: ठहरी है, या पूरी तरह भीतर आई है और ठहरी है— ऐसे जागतिक विराम के क्षण में व्‍यक्‍ति का क्षुद्र अहंकार विसर्जित हो जाता है। केवल अशुद्ध के लिए यह कठिन है। लेकिन तब तो यह विधि सब के लिए कठिन है, क्‍योंकि शिव कहते … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-04 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-03 (ओशो)

या जब कभी अंत: श्वास और बहिर्श्‍वास एक दूसरे में विलीन होती है, उस क्षण में ऊर्जारहित, ऊर्जापूरित केंद्र को स्‍पर्श करो। हम केंद्र और परिधि में विभाजित है। शरीर परिधि है। हम शरीर को, परिधि को जानते है। लेकिन हम यह नहीं जानते कि कहां केंद्र है। जब बहिर्श्‍वास अंत:श्‍वास में विलीन होती है। … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-03 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-02 (ओशो)

जब श्‍वास नीचे से ऊपर की और मुड़ती है, और फिर जब श्‍वास ऊपर से नीचे की और मुड़ती है— इन दो मोड़ों के द्वारा उपलब्‍ध हो। थोड़े फर्क के साथ यह वही विधि है; और अब अंतराल पर न होकर मोड़ पर है। बाहर जाने वाली और अंदर जाने वाली श्‍वास एक वर्तुल बनाती … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-02 (ओशो)

तंत्र-सूत्र—विधि-01 (ओशो)

शिव कहते है: हे देवी, यह अनुभव दो श्‍वासों के बीच घटित हो सकता है। श्‍वास के भीतर आने के पश्‍चात और बाहर लौटने के ठीक पूर्व– श्रेयस् है, कल्‍याण है। आरंभ की नौ विधियां श्‍वास-क्रिया से संबंध रखती है। इसलिए पहले हम श्‍वास-क्रिया के संबंध में थोड़ा समझ लें और विधियों में प्रवेश करेंगे। … Read more तंत्र-सूत्र—विधि-01 (ओशो)

विज्ञान भैरव तंत्र-भाग-1-ओशो

विज्ञान भैरव तंत्र—ओशो वज्ञान भैरव तंत्र का जगत बौद्धिक नहीं है। वह दार्शनिक भी नहीं है। तंत्र शब्‍द का अर्थ है। विधि, उपाय, मार्ग। इस लिए यह एक वैज्ञानिक ग्रंथ है। विज्ञान ‘’क्‍यों‘’ की नहीं, ‘’कैसे’’ की फिक्र करता है। दर्शन और विज्ञान में यही बुनियादी भेद है। दर्शन पूछता है। यह अस्‍तित्‍व क्‍यों है? … Read more विज्ञान भैरव तंत्र-भाग-1-ओशो